दिल हमारा बाग़ में बेजार क्यूँ है /
बिन तुम्हारे जिस्त से इनकार क्यूँ है //
बिन तुम्हारे जिस्त से इनकार क्यूँ है //
हजार नजरों का था निशाना दिल हमारा /
एक तीर तेरा ही जिगर के पार क्यूँ है //
होश है मुझको मगर बेहोश हूँ मैं /
बस तुम्हारा ही मुझे इंतजार क्यूँ है //
हो जाए दुश्मन जमाना फिर भी तो क्या /
एक प्यार तेरा ही मेरा संसार क्यूँ है //
करे जो जिद भुलाने की तुझे ये " निर्मल " /
हारता ये दिल मेरा हर बार क्यूँ है //
*****
No comments:
Post a Comment