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Thursday, December 6, 2012

dil hmara baag me...



 दिल  हमारा  बाग़  में  बेजार  क्यूँ  है / 
बिन तुम्हारे  जिस्त से इनकार क्यूँ है //

हजार नजरों का था निशाना दिल हमारा /
एक  तीर  तेरा ही जिगर के पार क्यूँ है //

होश  है  मुझको   मगर  बेहोश  हूँ  मैं /
 बस तुम्हारा  ही मुझे  इंतजार क्यूँ है //

हो जाए दुश्मन जमाना फिर  भी तो क्या /
एक  प्यार  तेरा  ही  मेरा   संसार क्यूँ  है //

करे जो जिद भुलाने की तुझे ये  " निर्मल " /
हारता  ये  दिल  मेरा   हर  बार  क्यूँ  है //

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