ओर जाम ना बना साकी पी चुका हूँ मैँ ।अब रहा ना होश बाकी पी चुका हूँ मैँ ।।
घोल दी है हवा मे उसने आँख से शराब ।जो बनी थी मय हवा की पी चुका हूँ मैँ ।।
अब तो रोकोगे मुझे किस तरह जाने वफा ।कसम दो चाहे खुदा की पी चुका हूँ मैँ ।।
जख्म तो वैसे का वैसा है देख लो जनाब ।र्दद रहा जरा ना बाकी पी चुका हूँ मैँ ।।
'निर्मल' अब किसी से कुछ नही है माँगता ।दरकार थी जिस दवा की पी चुका हूँ मैँ ।।
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