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कभी धूप से मोहब्त हो गयी , कभी छाँव से दिल लगा लिया।
मौसम बदलता है तो इन्सान बदल जाता है।।
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दुनिया है ये पैसे की है, पैसा ही सब कुछ यहाँ।
गरीबी में तो आईना भी पहचान बदल जाता है।
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कच्चे मकानों मे तो हम, खुश रहते है मगर।
महलों में ही दिलो का अरमान बदल जाता है।।
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यूँ तो हर धर्म के पक्के हैं हम सब हैं यहाँ।
देखकर दौलत मगर ईमान बदल जाता है।।
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जरूरतें ऐसी है "निर्मल" आज के इस दौर में।
होकर हर अपना यहाँ अनजान, बदल जाता है।।
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