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Tuesday, January 8, 2013

कभी धूप से...

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कभी धूप  से मोहब्त हो गयी , कभी छाँव से दिल लगा लिया।

मौसम बदलता है तो इन्सान बदल जाता है।।
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दुनिया है ये पैसे की है,  पैसा ही सब कुछ यहाँ।
गरीबी में तो आईना भी पहचान बदल जाता है। 
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कच्चे मकानों मे तो हम, खुश रहते है मगर।
महलों में ही दिलो का  अरमान बदल जाता है।।
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यूँ तो  हर धर्म के पक्के हैं हम सब  हैं यहाँ।
देखकर दौलत मगर ईमान बदल जाता है।। 
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जरूरतें ऐसी है "निर्मल" आज के इस दौर में। 
होकर हर अपना यहाँ अनजान, बदल जाता है।। 

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