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Sunday, January 13, 2013

मै शाम से ही . .



मै शाम से ही सोचता हूँ ये ख्वाब देखूंगा। 
बस आपको ही आपको जनाब देखूंगा।। 

वो पूछते है हमसे मोहब्बत की है कितनी ?
देखूंगा .... , देखूंगा .... हिसाब देखूंगा।।

बात बिछड़ने की उनसे कर नहीं पाया।
जनता था आँख में सैलाब  देखूंगा।।

अब सामने तुम हो तो देखने दो मुझको
हाजिर तुम ना होगे महताब देखूंगा।।

अभी तो तस्विर तेरी देखता है "निर्मल"।
फिर कभी अपनी किताब देखूंगा।।


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