आदमी
आज का आदमी,
स्वार्थी
समन्दर के आंसूओं से नमक बना लेता है
मधुमखियों की जीवन भर
की कमाई पर चाकू चला देता है
और उसी कमाई को हथेली से चाटकर
वाह-वाह करता है
बकरे को मारने के लिए तो पाल लेता है
लेकिन जिन्दा रखने के लिए नहीं
आज का आदमी,
स्वार्थी
समन्दर के आंसूओं से नमक बना लेता है
मधुमखियों की जीवन भर
की कमाई पर चाकू चला देता है
और उसी कमाई को हथेली से चाटकर
वाह-वाह करता है
बकरे को मारने के लिए तो पाल लेता है
लेकिन जिन्दा रखने के लिए नहीं
आदमी
आज का आदमी,
स्वार्थी।।
No comments:
Post a Comment