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Wednesday, March 12, 2014

तूझको देखूं खुदा...



तूझको देखूं खुदा देखूं
तूझको छू लूं खुदा छू लूं
तूझको पा लूं खुदा पा लूं
यही मेरा आलम है आजकल
मेरे ख्वाबोँ के समन्दर मे
सिर्फ तेरी ही यादोँ का पानी है
मेरी उमीद की सरहद
तुझ तक ही सिमटी है
मै खुद से बातेँ किया करता हूँ
सिर्फ तेरी ही हरकतोँ की
मेरे दामन के किनारो तक
तेरी यादोँ का ही आँचल है
मेरी साँसो की चार दीवारी पर
चढा है रंग तेरी यादोँ का ही
अपनी हर हरकत को लिखवाकर तूने
कितनो को शायर बना डाला
मै तूझसे दूर हूँ
मगर कभी लगा ही नही
तेरी करीबी का स्वाद
अभी तक बदन पर चिपका है ।।

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