पैसा-ए-जेब सत्ता का नशा यही सोच रहा था ।।
कोई आएगा मसीहा, इसी इन्तजार में ।
करते है हर दिन नया, यही सोच रहा था ।।
मैं जिधर भी गया मुझे, वहीँ आईने मिले ।
मैं बदलूं तो बदले हवा, यही सोच रहा था।।
मिलेंगे दिल, गले मिलेंगे, मोहबतें होंगी ।
आएगा कब ये हौसला, यही सोच रहा था ।।
मै देखता हूँ तो वो, मुँह फेर लेता है।
चुभती है क्या मेरी निगाह, यही सोच रहा था।।
हिन्दू नहीं, मुस्लिम नहीं, दिल भारतीय़ हो।
शुरू हो कब ये सिलसिला, यही सोच रहा था ।।
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