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Sunday, July 6, 2014

जरूर लौटोगी..


तुम तो कायर निकले 

भाग निकले एक झूठ से डरकर 

झूठ ना था तो क्या था ?

और अगर सच था तो और भी बड़ी कायर 

क्यूंकि जो सच का भी सामना न कर सकी
 
वो कैसी tigeress 

और जो झूठ की फूँक से बूझ गयी 

वो भी कैसी ज्योति 

बजाए आईने को साफ़ करती 

तुमने तो आईने को ही तोड़ दिया
 
लेकिन मैं ये जानना चाहता हूँ कब तक 

कब तक भागोगी ऐसे ?

ये तो जिन्दगी है

 रोज ऐसे ही किस्से घटेंगे इसमे 

जीवन के अन्त तक 

तुम्हारे गढ़े  शब्दों को पढ़ता था तो लगता था
 
क़ोई है जो लोहा ले रहा है 

जिंदगी के गमो से और 

और दिखाकर अँगूठा हर  गम को मुस्कुराता रहता है
 
पर ये क्या तुम तो खुद ही झूल गई 

झूठ की रस्सी पर फाँसी 

अपनी ही कलम के लिखे शब्दों की लाज न रख पाई तुम 

इतनी कमजोर निकलोगी 

तुम तो आर्टिस्ट थी 

फिर क्यूँ अपनी ही बनाई हुई तस्वीर से डर भागी ?

जो शोलों पर चलने की बात करती थी 

वो माचिस की डिबिया से डर गयी 

ये कैसा इल्जाम ले लिया तुमने 

अपनी ही फेवरिट तस्वीर पर 

अब कैसे सामना करोगी  परछाई का रोशनी में 

और कब तक रहोगी अन्धेरे की 

दीवार के साये में छिपकर

मैं तो दोस्त था, अगर गलत था 

तो बुरा भला कहती, कान मरोड़ती ,  नाराज होती

मै मनाऊंगा ये सोचती 

मै मनाता तो क्या अगर मुझे मनाना नहीं आता 

मगर मैं तस्वीर इतनी धूंदली नहीं होने देता 

अगर तुम गलत थी तो बताती 

सवांरती अपनी गलती 

तरीका तो ये होता दोस्ती की तस्वीर साफ़ रखने का 

मैं तो दोस्त हूँ अच्छे वाला, सच्चे वाला 

इन्तजार करूंगा हर आने वाले कल तक 

इस यकीन के साथ की तुम लौटोगी

नई बात के साथ नए हालात के साथ 

एक सवाल के साथ, एक जवाब के साथ 

जरूर लौटोगी ।। 

nemmy 





















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