सिलसिला वो आज भी जारी है उसी तरह ।
तेरी याद मेरी नींद पर भारी है उसी तरह ।।
कटे थे पल बिछुडकर आंसूओं के साथ जो ।
आज की ये रात फिर गुजारी है उसी तरह ।।
तू भूल जाना चाहता है तो भूल जा मुझे मगर ।
मुझको वो यादें आज भी प्यारी है उसी तरह ।।
छोडकर जैसे मुझे चला गया उस रोज तू ।
आज भी वो जिन्दगी हमारी है उसी तरह ।।
जिस शौक से नसो मे जैसे नशा उतारा जाता है ।।
सीने मे तेरी याद मैने उतारी है उसी तरह ।।
करता हूँ बीते वक्त से बातें मै रोज बैठकर ।
तस्वीर वही सामने तुम्हारी है उसी तरह ।।
वो सूरत जिसमे देखता था मैं खुदा कभी ।
तेरा अक्स मेरे जैहन पर तारी है उसी तरह ।।
Written by nirmal singh
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