शराफत से अब इस दुनिया में काम नहीं चलता।
सिक्का शरीफों का सरे-आम नहीं चलता ।।
चलती है आज लडकों को झुके कन्धों की मजदूरी।
जवान बेटे को बूढ़े बाप का आराम नहीं चलता।।
चल जाता है मर्द बीता दे हजार रातें बाहर।
कट जाये बाहर औरत की इक शाम नहीं चलता ।।
हो रहा है अपनी हिन्दी के साथ ऐसा क्यूँ ।
चलता है फुल स्टॉप, पूर्ण विराम नहीं चलता ।।
"निर्मल" इस देश को हो गया है क्या ।
चलती है बड़ों को हाय, प्रणाम नहीं चलता ।।
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