जख्म जो लगा मुझे वो, एक पल मे भर गया ।
था मेरे सीने मे दर्द, दुनिया भर के बोझ का ।
फूल सा है दिल भी उसका, फूल से है हाथ भी ।
वो गोद है जैसे खुदा की, भगवान् का सा रुप है ।
हारकर लौटा नही, प्यार हो या जंग हो ।
'निर्मल' सहारा है प्यार माँ, का एक ही जहान् मे ।
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